Bridge Ki Paribhasha

जब चार यार मिल जाये
संग ताश की गड्डी हो
सबको ब्रिज आता हो
क्या मौज हो मस्ती हो

तेरह पत्तो में जब तेरह हो नंबर
बोली तब ही बोलो ओ लाला ओ मिस्टर
ब्रिज खेल सभी का जग में
सब यहाँ ब्रदर सिस्टर

एक एक इक्के के तुम
यहाँ गिन लो नंबर चार
किंग जितने हो उनके
तुम तीन जोड़ लो यार

हर रानी के दो नंबर
हो जैक का एक नंबर
किस रंग के कितने पत्ते
यह देख समझ लो यार

चिड़ी ईंट है माइनर
और पान हुकुम मेजर
नो ट्रंप है इनसे बढ़कर
बोली हो बढ़ चढ़ कर

कैसे कैसे क्या बोलें
और कब क्या न बोलें
जब बोली लगती हो
मिलकर ताकत तोलें

कोई मेजर रंग खेलेगा
कोई नो ट्रम्प बोलेगा
कोई पास करेगा आगे
कोई डबल भी कर देगा

कैप्लेटी कोई खेलेगा
जैकोबी ट्रांसफर होगा
ब्लैक्वुड कन्वेशन का
स्लैम में प्रयोग होगा

जब एन टी में खेलोगे
तुम्हे तीन बनाने हैं
हुकुम पान में तुमको
चार हाथ कमाने हैं

मज़बूरी हो तब ही
तुम चिड़ी ईंट खेलो
हो पांच हाथ की हिम्मत
तब ही मुंह तुम खोलो

अब खेल शुरू होता है
फोकस पत्तो पर हो
जिसकी बोली ऊंची थी
वो खेलेगा खुलकर

जब खेल ख़तम होगा
सब लिखा जायेगा
क्या खोया या क्या पाया
अब बतलाया जायेगा

अभय शर्मा
26 जनवरी 2013

by Abhaya Sharma

Comments (3)

Awesome I like this poem, check mine out 
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very nice compliment for his love... ~There lives more life in one of your fair eyes Than both your poets can in praise devise. ~