कभी मयस्सर न हुआ।

प्यार, प्यार, प्यार नाम सुनते मेरे कान पक गये,
उसका एक बूँद, कभी मयस्सर न हुआ।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

Comments (1)

Awesome I like this poem, check mine out