तेरी मधुर मुस्कान पे दिलवर,

तेरी मधुर मुस्कान पे दिलवर,
हम मर गए, हम लूट गए।
काली कजरारी कटारी करारी ने,
किया कसमों से करार।
तीर कुछ ऐसी लगी कि,
हम लूट गए औ मर गए।।
अधरों में आभा छिपी थी,
तेरे हर एक इकरार की हर्रफ,
हमने उस लम्हे को देखा,
हम लूट गए औ मर गए।।
हम तलफते रहे, तुम तड़पते रहे,
लेकिन जुबां नजरें कभी खुली नहीं,
लेकिन झोंका एक ऐसा आया,
हम लूट गए औ मर गए।।
तुम मुझे गरहार बना लो,
औ मेरे तुम उर हार रहो ।
दोनों एक दूजे में झूले ऐसे,
कि हम लूट गए औ मर गए।।
लम्हा लंबा बीत चला अब,
और सुकूँ मिलता नहीं ।
अपने सीने से सटा लो,
हम लूट गए औ मर गए।।
चादर डाल ऐसे छिपा लो,
अब न छोड़ना कहीं कभी,
'नवीन' दामन में समा लो,
हम लूट गए औ मर गए।।

by Dr. Navin Kumar Upadhyay

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