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Love, Love
(17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

Love, Love

Poem By John Paul Pannell

विशुद्ध और पावन
Saturday, January 20,2018
7: 45 AM

विशुद्ध और पावन


राधा। मोरे चित ना हरो
में तो हूँ एक ग्वालो
मेरा जीवन एक गोपालक जैसा
सब को लगे सहसा।

मेरे दिल में तुम ही बसे
रोम रोम बस एक ही नाम पुकारे
जीवन मेरा धन्य
ना चाहु किसी अन्य।

मीरा भी तो मेरी भक्त
में कैसे रहूं रिक्त
एक मेरे भजन की दीवानी
एक मेरे रूप की दीवानी।

तन, रोम बस मुझे ही तरसे
मानो भवभव से ही प्यासे
एक ही नाम की माला जपे
फूलम कुसुम आदि अरपे।

एक है जोगन
दूसरी वियोगन
दोनों है विशुद्ध और पावन
कहाँ मिले ऐसी भावना कोई तपोवन।

एक ही तड़प
एक ही संकल्प
आयु है अल्प
माला से एक नाम जप।

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welcome Thilagesh Thilageshwaran 3 mutual friends 1 Manage Like Like Love Wow · Reply · 2m
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