• मुझमें तुम..

    तुम्हारे माथे की एक शिकन,
    और ज़िंदगी सज़ा सी लगने लगती है,
    तुम मुझमें वैसे हो..
    जैसे, जिस्म में साँसें..... more »

  • वेश्या...

    हर रात मैं,
    अपने जिस्म को सजाती, संवारती हूँ..
    फिर तलाशती हैं आँखें,
    एक दूसरे जिस्म को..... more »