Sukrita Paul Kumar Poems

Insight

In the centre of
That circle of light
Rising slowly
over the river of experience
panting and huffing

Lies the truth of my life

so white
I cannot see it

All colours merged,
Lives absorbed
the white becomes whiter
And I
More blind... more »

BREAKING SILENCE

Words fall
From her mouth
As rain

On deserts.

……..

After
Storms and cyclones
In the heart

Words dropping
As stones.
……..

Words as frozen ice
Stuck in the
Throats

Of lovers.

……..

Melting in thought
Floating in the mind

Words
Collecting in
unuttered sentences.... more »

पगोडा कविताएँ

नौ बार, और फिर से
एक ही शब्द, शून्य
उभरता बार-बार
उस भिक्षु-गुरु की
बीस-शब्दीय
कविता में

ड्रैगन -वे कहते हैं—
गहरे उतरता है सागर में
अर्थ की खोज में
और मणियाँ उगलता है
नुकीली चट्टान बनती हैं मणियाँ
बेध जाती हैं चट्टानी मर्म को

उठते हैं ऊपर
रोशनी के स्तम्भ
अद्भुत रंगों से सजे

नाच उठते हैं दैत्य
देवों से ताल मिला

कुल मिलाकर
शून्य में जुड़ता चलता
कुछ, बहुत कुछ
और रचता है अर्थ !

*

क्या है वास्तविक ?

आसमान में फड़फड़ाते
पक्षी की छवि
या फिर
तेज़ बहती नदी में
रुका हुआ अक्स

पानी में हिलता चाँद
या फिर ऊपर
ठहरा चाँद

समानान्तर

निरंतर !... more »

Sukrita Paul Kumar Quotes

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